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बिहार में किसानों की डिजिटल पहचान को लेकर राहत, फार्मर रजिस्ट्री की समय-सीमा 11 फरवरी तक बढ़ी

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बिहार में किसानों की डिजिटल पहचान बनाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए फार्मर रजिस्ट्री की समय-सीमा बढ़ा दी गई है। अब राज्यभर में 11 फरवरी तक पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाकर किसानों की डिजिटल आईडी तैयार की जाएगी। विशेष कैंपों में तकनीकी सहयोग और ऑन-स्पॉट सहायता मिलने से पंजीकरण की रफ्तार तेज हुई है और पिछले पांच दिनों में 11,296 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी की गई है। किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए प्रशासन ने चार दिन का अतिरिक्त समय दिया है। पटना जिले में 322 पंचायतों में फिर से विशेष कैंप आयोजित होंगे। इससे पहले 2 से 6 फरवरी तक चले शिविरों में पीएम किसान सम्मान योजना के 10 हजार से अधिक लाभुकों ने ई-केवाईसी सत्यापन कराया। जिले में पीएम किसान सम्मान निधि के कुल 1.48 लाख लाभुक हैं, जिनमें से अब तक 83,482 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य बनाने के पीछे उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल और कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर रजिस्ट्री में तेजी लाने को कहा है। अब तक राज्य में करीब 43 प्रतिशत किसानों की डिजिटल आईडी बन चुकी है, जबकि केंद्र सरकार से एससीए योजना की दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए 50 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण अनिवार्य है। इसी बीच पटना डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने लोक शिकायत से जुड़े 10 अपीलीय मामलों की सुनवाई कर त्वरित निपटारा किया। जमीन विवाद, सेविका नियुक्ति में अनियमितता और पंचायत स्तर पर राशि गबन जैसी शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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